यूकॉस्ट का 21वां विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन शुरू: क्षेत्रीय चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान और ‘विकसित उत्तराखंड 2047’ पर चर्चा

देहरादून, पहाड़ी न्यूज रूम। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से विज्ञान धाम में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (यूएसएसटीसी-2026) का भव्य शुभारंभ हुआ। ‘विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ की सोच के साथ आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के लगभग 1,000 वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा और महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने नई विज्ञान नीति-2026 और ‘विज्ञान सेतु’ पहल की रूपरेखा साझा करते हुए राज्य की क्षेत्रीय चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान खोजने पर बल दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति-2026 तथा ‘विज्ञान सेतु’ पहल की जानकारी दी।
इस दौरान ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति : विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ विषय पर विचार-मंथन भी हुआ। सम्मेलन के पहले दिन 13 तकनीकी प्रभागों में 260 से अधिक शोधपत्र मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से पेश किए गए। कृषि, पर्यावरण, जैव प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, नैनो प्रौद्योगिकी और उभरती तकनीकों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
विज्ञान संचार सत्र में वैज्ञानिक उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका पर जोर दिया गया। ‘लैब ऑन व्हील्स’ अभिमुखीकरण कार्यक्रम और द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग भी आयोजित हुई। सम्मेलन परिसर में 60 से अधिक वैज्ञानिक एवं शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स ने अपनी उपलब्धियों तथा नवाचारों की प्रदर्शनी लगाई। आयोजन का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज की जरूरतों से जोड़कर उत्तराखंड के सतत विकास को गति देना है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (यूएसएसटीसी-2026) के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद समस्याओं की पहचान कर उनके वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत है। विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को समाज की आवश्यकताओं से जोड़कर विकास को गति दी जा सकती है। उन्होंने वैज्ञानिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग और शोध को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।



