उत्तराखंड

केदार-मदमहेश्वर घाटी में ठंड बढ़ने के साथ शुरू हुई पशुपालकों की घर वापसी

ऊखीमठ। केदार घाटी के हिमालयी भूभाग में मौसम का मिजाज बदलते ही ठंड ने दस्तक दे दी है। इसके साथ ही, पिछले छह महीनों से ऊंचे बुग्यालों और हिमालयी घास के मैदानों में अपने पशुधन के साथ डेरा डाले भेड़ पालकों ने अब सुरक्षित गांवों की ओर वापसी शुरू कर दी है। अनुमान है कि दीपावली के पावन पर्व तक अधिकांश पशुपालक अपने घरों तक पहुंच जाएंगे। बता दें कि केदार घाटी, मदमहेश्वर घाटी के विभिन्न गांवों के भेड़ पालक प्रतिवर्ष ग्रीष्मकाल शुरू होते ही अपने पशुधन के साथ हिमालयी बुग्यालों का रुख करते हैं। यहां वे करीब छह महीने तक ऊंचाई वाले घास के मैदानों में भेड़-बकरियों को चराते हुए प्रकृति के बीच जीवन व्यतीत करते हैं। बुग्यालों में उपलब्ध हरी घास व अनुकूल मौसम उनके पशुधन के पालन-पोषण के लिए महत्वपूर्ण होता है।

गर्मियों में गांवों से दूर रहने वाले इन पशुपालकों की दिनचर्या पूरी तरह पशुधन की देखभाल और चारागाहों की तलाश पर निर्भर रहती है। भेड़ पालक प्रेम भट्ट, वीरेन्द्र धिरवाण व रघुवीर सिंह नेगी का कहना है कि ग्रीष्मकाल में बुग्यालों में पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध होने से भेड़-बकरियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां रहती हैं, लेकिन शीतकाल शुरू होते ही तापमान में गिरावट आने लगती है। इसलिए समय रहते पशुधन को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना जरूरी हो जाता है। प्रधान बुरूवा मदन भट्ट ने बताया कि हिमालयी भूभाग में बदलते मौसम के साथ भेड़ पालकों की घर वापसी का सिलसिला तेज हो गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button